उत्तर प्रदेश के इस जिले में 333 दिनों से धनगर समाज का धरना-प्रदर्शन अनिश्चित काल के लिए जारी

उत्तर प्रदेश के इस जिले में 333 दिनों से धनगर समाज का धरना-प्रदर्शन अनिश्चित काल के लिए जारी

धनगर समाज का अनिश्चितकालीन धरना पिछले 333 दिनों से मथुरा कचहरी के वट वृक्ष के नीचे जारी है। इस धरने की अगुवाई कल्याण सिंह बाबा कर रहे हैं,

जो दिन-रात धरने पर डटे हुए हैं। हाल ही में उनकी तबीयत खराब हो गई, लेकिन बाबा ने अस्पताल में भर्ती होने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक धनगर समाज के प्रमाण पत्र जारी नहीं होते, वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।आज प्रशासन की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट और डॉक्टरों की एक टीम आई, जिन्होंने बाबा की तबीयत का जायजा लिया। उन्होंने बाबा को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन बाबा ने इसे ठुकरा दिया।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके लिए मरना मंजूर है, लेकिन अपने समाज के हक के लिए लड़ाई छोड़ना नहीं। धनगर समाज विकास समिति के अध्यक्ष सतीश धनगर ने भी बाबा के समर्थन में कहा कि जब तक हमारे समाज के प्रमाण पत्र जारी नहीं होते, हम भी धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि अन्य जिलों में प्रमाण पत्र नियमित रूप से जारी हो रहे हैं, लेकिन मथुरा में प्रशासन की तानाशाही और पक्षपात के कारण ऐसा नहीं हो रहा है।समाज के लोगों का कहना है कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है, जिसे प्रशासन अनदेखा कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि धनगर समाज के नेता, मंत्री, विधायक और जिला पंचायत सदस्य होने के बावजूद, उनके समाज को उनके हक से वंचित किया जा रहा है। धनगर समाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाते, तब तक यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

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धनगर संवैधानिक अधिकार के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु !


धनगर संवैधानिक अधिकार के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु !
धनगर संवैधानिक अधिकार के संबंध में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण अधोलिखित बिन्दुओं से समाज हित / न्याय हित में उत्तर प्रदेश निवासी सभी लोगों को अवगत कराना चाहता हूं। अतः जो व्यक्ति धनगर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पात्र हैं अर्थात गडरिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले वह व्यक्ति / परिवार जिनके सामान्य तौर पर शादी संबंध धनगर में हैं निखर में नहीं है विशेष तौर पर इस जानकारी का लाभ उठाते हुए धनगर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करें जिसके निरस्त किए जाने पर जनहित गारंटी अधिनियम में उपजिलाधिकारी को अपील करें:-

  1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी एवं जिला/तहसील प्रशासन को विधिक स्रोत से प्राप्त एकमात्र स्पष्टीकरण आदेश दिनांक 24 जनवरी 2019 (जो किसी भी न्यायालय से स्थगित नहीं है) के बिंदु संख्या 4 में उल्लेखित है कि ‘अशिक्षा एवम अज्ञानतावश पूर्व में जिन धनगर जाति के व्यक्ति या परिवार के सदस्यों के किन्ही अभिलेखों में धनगर जाति के स्थान पर संबैधानिक व्यवस्था के विपरीत गडेरिया आदि अंकित हो गया है और विभिन्न परिस्थितियों में उनको गडेरिया – अन्य पिछड़ा वर्ग का त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो गया है तो उसे धनगर जाति प्रमाण पत्र निर्गत न करने का आधार न माना जाय बल्कि उक्त त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण को निरस्त / निष्प्रभावी मानते हुए गडरिया जाति में वर्गीकरण धनगर निखर के आधार पर आवेदक के मूल निवास के आसपास से निर्विवादित परिवारों से स्थलीय पूछताछ एवम जांच पड़ताल कर सक्षम अधिकारी यह अवश्य सुनिश्चित कर लें कि आवेदक धनगर उपजाति का है अथवा निखर का । यदि आवेदक धनगर उपजाति का है तो उसे धनगर अनुसूचित जाति का ही प्रमाण पत्र निर्गत किया जाय।’ स्पष्टीकरण आदेश दिनांक 24 जनवरी 2019 के बिंदु संख्या 5 में उल्लेखित है कि अगर ‘धनगर उपजाति की पहचान करने में कोई कठिनाई हो तो धनगर निखर उपजातियों के बीच शादी संबंधों (रोटी, बेटी एवं हुक्का पानी) संबंधों के आधार
    पर स्थलीय जांच पड़ताल कर धनगर उपजाति के लोगों को धनगर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करना सुनिश्चित करें ।’
  2. माननीय उच्च न्यायालय में योजित पीआईएल संख्या 645/400 में दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश में भी 24 जनवरी 2019 को जारी एकमात्र स्पष्टीकरण आदेश को स्थगित नहीं किया गया है क्योंकि इस पीआईएल में दिए गए अंतरिम आदेश में अनुलग्नक 2, 3, 4 को ही स्थगित किया गया है जबकि 24 जनवरी 2019 का शासनादेश अनुलग्नक 1 के तौर पर उल्लेखित होने के कारण स्थगन का भाग नहीं है और कोर्ट आदेश में अपनी मर्जी से कुछ भी जोड़ने घटाने की अनुमति नहीं होती है। इस तथाकथित स्थगन आदेश में भी उल्लिखित है कि “benefit of reservation shall be strictly extended to the categories mentioned in Presidential Notification applicable to Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Other Backward Class in State of U. P” अर्थात राष्ट्रपति महोदय के आदेश में उल्लेखित Dhangar (धनगर) पर कोई रोक / स्थगन नहीं है।
  3. माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका संख्या 1582/2021 में स्पष्टीकरण आदेश दिनांक 24 जनवरी 2019 को स्थगन आदेश में शामिल करने के लिए स्थगन आदेश को मॉडिफिकेशन हेतु प्रयास किया गया जिसमें माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर रुपये 3000 का दंड लगाया तथा याचिका को निरस्त कर दिया।
  4. माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा जारी अनुसूचित जाति आदेश 1950 में क्रमांक 27 पर धनगर पूरे प्रदेश के लिए अधिसूचित है जिस पर कोई भी स्थगन नहीं है और ना ही बिना संविधान संशोधन के हो सकता है अतः समस्त शासनादेश स्थगित या निरस्त होने के बावजूद धनगर अनुसूचित जाति को उसका संवैधानिक अधिकार लेने से नहीं रोका जा सकता है। अर्थात बिना संविधान संशोधन के किसी भी पीआईएल में कुछ भी आदेश आने से
    धनगर अनुसूचित जाति को उसका संवैधानिक अधिकार लेने से नहीं रोका जा
    सकता है।
    5) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 40462/2009 में दिए गए आदेश के आधार पर अनुसूचित जाति आयोग द्वारा प्रदान किए गए स्पष्टीकरण को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 12436 / 2007 में स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति महोदय के आदेश में उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति की सूची में क्रमांक 27 पर उल्लिखित धनगर को धनगर ही माना गया है तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 34520/2006 में दिए गए आदेश के अनुसार धनगर को गडरिया समुदाय की एक उपजाति माना गया है।
  5. राज्य सरकार के जाति प्रमाण पत्र जारी करने संबंधी ऑनलाइन पोर्टल पर हिंदी और अंग्रेजी में धनगर Dhangar अनुसूचित जाति के लिए ही आवेदन किया जा सकता है। धनगढ़ या धांगर के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है ।
  6. आदरणीय कमिश्नर महोदय आगरा द्वारा 28/10/2022 को देवेश सिंह धनगर निवासी फिरोजाबाद के मामले में भी जिला जाति सत्यापन समिति फिरोजाबाद के आदेश को निरस्त करते हुए गडरिया समुदाय में धनगर और निखर वर्गीकरण के आधार पर जांच करने का आदेश पारित किया गया है।
  7. भारत सरकार द्वारा कराई गई विभिन्न जनगणना में धनगर अनुसूचित जाति की जनसंख्या विभिन्न जिलों में दर्शाई गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी एकमात्र स्पष्टीकरण आदेश 24 जनवरी 2019 में भी लिखा है कि धनगर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के लिए किया गया आवेदन यह कहकर निरस्त नहीं किया जा सकता कि अमुक जिले / तहसील में धनगर अनुसूचित जाति नहीं पाई जाती है।
    -इंजी. संतोष धनगर, आईईएस प्रदेश सचिव, ऑल इंडिया धनगर
    समाज महासंघ (रजि.) मो. 9868004027

धनगर समाज पत्र से संबंधित शासनादेश


धनगर समाज जिन्दाबाद !
प्रेषक,
स्पष्ट शासनादेश
मनोज सिंह (प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन)
सेवा में

  1. समस्त मण्डलायुक्त उ. प्र.
  2. समस्त जिलाधिकारी उ.प्र.
    समाज कल्याण अनुभाग – 3
    धनगर समाज जिन्दाबाद !
    संख्या : 207 सी. एम. / 26-3-2018
    लखनऊ : दिनांक 24 जनवरी 2019
    विषय : धनगर (DHANGAR) जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण निर्गत करने हेतु स्पष्टीकरण (Clarification Order) ।
    महोदय, उपर्युक्त विषय की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए मुझे कहने का निदेश हुआ है। कि धनगर जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए शासनदेश सं.1654/26 26.0.2013 दिनांक 25.10.2013 पत्र सं. 222 /2016/5506/26-3-2016 हरट 2010 दिनांक 16.12.2016, पत्र सं. 283, मा.स./ 26.3.2017.25 रिट/2010 दिनांक 26.09.2017, पत्र सं. 148म.स./ 26.3.2017- 253 रिट/2010 दिनांक 12.10.2017 एवं पत्र सं . – 453 / 26.3.2018 दिनांक 07.02.2018, निर्गत किये गये है। मा. मुख्यमंत्री जी को ऑल इण्डिया धनगर समाज महासंघ (पंजी.सं. S/W//2013) एवं जनजाति निधियों ने अवगत कराया है। कि उक्त निर्देशों के उपरान्त भी गड़रिया समुदाय की उपजाति धनगर (Dhangar ) के व्यक्तियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र सुगमतापूर्वक जारी नहीं किये जा रहे । सक्षम अधिकारी धनगर जाति के आवेदन पत्रों को गड़रिया (अन्य पिछड़े वर्ग) अथवा उपजाति के आधार पर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता है। अथवा धनगर जाति सम्बन्धित तहसील / जिला में नहीं रहती है इत्यादि कहकर निरस्त कर देते है यह उचित नहीं है।
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 341 में प्रवक्त प्रावधान के अन्तर्गत संविधान (अनुसूचित जातियों ) आदेश 1950 के तपबन्धो के जातियोंया जनजातियों (Castes, Races or Tribes) या उनका कोई भाग या समूह (Or Parts of or groups ) जो कि इस आदेश में वर्जित तथा राज्य विशेष से सम्बन्धित अनुसूची (भाग 1 से 16 तक) में है, को इस आदेश के अधीन स्थायी या क्षेत्रीय निवास के आधार पर उस जाति, उपजाति या जनजाति के उदस्यों को अनुसूचित जाति का उदस्य समझा जाएगा। इस सम्बन्ध में उ.प्र. लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसमचित व अन्य पिछड़े वर्गों के लिए अधिनियम 1994 की धारा –9 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए शासनादेश सं. 22/16/90-का-2 / 1998 टी. सी. – 111 कार्तिक अनुभाग – 02 दिनांक 05 जनवरी 1996 में अभ्यर्थी की जाति पर अभ्यार्थी मे मल निवास से स्थलीय-पूछताछ/ जाँच पड़ताल करके जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने का आदेश पारित किया गया है।
  4. सिविल रिट याचिका सं. 40462/2005 ऑल इण्डिया धनगर समाज महासंघ व अन्य में मो. उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्णय 14.03.2012 के पारित निर्णय में गड़रिया जाति की दो उपजातियाँ धनगर (Dhangar एवं नीखर (Nikhar) वर्गीकृत है। इन दोनों उपजातियों के बीच रोटी-बेटी एवं हुक्का-पानी के सम्बन्ध नहीं रहे है। भारतीय संविधान के अनुष्छेद 341 के अन्तर्गत निगत “संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश 1950” (यथा सशांधित) में भाग – 8 उत्तर प्रदेश राज्य के अन्तर्गत क्रमांक 27 पर धनगर (Dhangar ) समस्त राज्य ( Throughout the state) में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित है। यह जाति उत्तर प्रदेश राज्य के समस्त जनपदों में निवासरत है। शासन के सज्ञान में आया है। कि धनगर जाति के व्यक्ति सामाजिक हीन भावण अपने नाम के साथ पाल और बघेल उपनाम (Surname) लगते है। अतः एवं धनगर जाति के व्यक्तियों को उपनाम के आधार पर अनुसूचित जामि के अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है।
  5. उ0प्र0 लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों व अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा – 9 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एवं महाधिवक्ता की विधिक राय से शासन ने निणर्य लिया है कि अशिक्षा एवं अज्ञानतायशा पूर्व में जिन धनगर जाति के व्यक्ति के व्यक्ति अथवा उनके परिवार के सदस्यों के किन्ही अभिलेखों में धनगर जाति के स्थान पर संविधानिक व्यवस्था के विपरीत गड़रिया आदि अंकित हो गया है। और विभिन्न परिस्थितियों में उनको गड़रिया अन्य पिछड़ा वर्ग का त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो गया है। तो उसे धनगर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत न करने का आधार न माना जाये बल्कि उक्त त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण पत्र को रिस्त / निष्प्रभावी मानते हुए गड़रिया जाति में वर्गीकरण (धनगर एवं नीखर) के आधार पर आवेदक के मूल निवास स्थान के आस-पास के निर्विवादित परिस्तरों से स्थलीय पूछताछ जाँच पड़ताल कर समान अधिकारी यह अवश्य सुनिश्चित कर ले कि आवेदक धनगर उपजाति का है अथवा नीखर का । यदि आवेदक धनगर उपजाति का है तो णनगर अनुसूचित जाति का ही जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जाये। 5. यदि किसी जिला- तहसील में जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले सक्षम अधिकारियों को धनगर उपजाति ( व्यक्तियों के समूह) की पहचान करने में कठिनाई हो तो धनगर एवं नीखर उपजातियों के बीच शादी सम्बन्धों (रोटी-बेटी एवं हुक्का-पानी) के आचार पर स्थलीय सोच पड़ताल धनगर उपजाति के लोगो को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करना सुनिश्चित करें। इन स्पष्ट निर्देशो के उपरान्त भी यदि धनगर जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने को अनावश्यक रूप से विलम्ब किये जाने प्रकरण के संज्ञान के आयेगें तो सम्बन्धित अधिकारियों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी। अतः उपरोक्तानुसार स्थलीय – पूछताल / जाँच-पड़ताल करके धनगर जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करने को कष्ट करें। संख्या – 207 (1)/28-3-2018 तद दिनांक
    प्रतिलिपि निम्नलिखित की सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित ः–
  6. अपर मुख्य सचिव / प्रमुख महामहिम श्री राज्यपाल उ०प्र०
  7. समस्त अमर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव उ०प्र० शासन
  8. समस्त जिलाध्यक्ष / कार्यालयाध्यक्ष उ०प्र०
  9. अध्यक्ष / सचिव अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग उ०प्र० लखनऊ।
  10. प्रमुख सचिव मा0 मुख्यमंत्री उoप्रo शासन 4. अगर मुख्य सचिव
    भवदीय मनोज सिंह (प्रमुख सचिव )
  11. आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उ०प्र० लखनऊ
  12. निदेशक उच्च शिक्षा विभाग माध्यमिक शिक्षा विभाग, बेशिक शिक्षा विभाग प्राविधिक शिक्षा चिकित्सा शिक्षा कृषि विभाग उ०प्र०।
  13. निदेशक अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण विभाग, उ०प्र० / पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग उ०प्र०
  14. निदेशक अनुसचित जाति एवं जनजाति, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उ०प्र० ।
  15. सचिवालय के समस्त अनुभाग ।
  16. गार्ड फाइल।
    के बाबजूद धनगर अनुसूचित प्रमाण पत्र जारी न होने के कारण धनगर समाज करेगा चुनावी बहिष्कार
  17. निदेशक प्रशिक्षक श्रम एवं सेवा योजना उ०प्र० प्रशासिक अकादमी लखनऊ
  18. रजिस्ट्रर प्रदेश समस्त विश्वविद्यालयों ।
    भवदीय – मनोज सिंह (प्रमुख सचिव )
    निवेदक : धनगर समाज फिरोजाबाद

अमेरिका ने पहली बार आवेदकों के लिए प्रतीक्षा समय कम करने के लिए भारतीयों के लिए नये वीजा पहल की घोषणा की


संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहली बार वीज़ा आवेदकों के लिए प्रतीक्षा समय को कम करने के लिए देश भर में वीज़ा कर्मचारियों की अधिक संख्या सहित भारतीयों के लिए नये वीज़ा पहल की घोषणा की है।

इस पहल के हिस्से के रूप में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने उन आवेदकों को समायोजित करने के लिए देश भर में कांसुलर संचालन शुरू किया, जिन्हें इन-पर्सन वीज़ा साक्षात्कार की आवश्यकता होती है। COVID-19 महामारी के परिणामस्वरूप अमेरिकी वीजा प्रसंस्करण क्षमता में भारी कमी आई, और इसके कई दूतावास और वाणिज्य दूतावास कभी-कभी केवल आपातकालीन सेवाओं की पेशकश करने में सक्षम थे।