बाराबंकी की पूजा पाल ने बनाया धूल रहित थ्रेशर

बाराबंकी की रहने वाली इंटरमीडिएट की छात्रा पूजा पाल आज देशभर के लाखों बच्चों के लिए मिसाल बन चुकी हैं. मिट्टी-खपरैल के घर, दीये की रोशनी और गरीबी से लड़ते हुए पूजा ने वो कर दिखाया, जो अक्सर संसाधनों से भरपूर बच्चे भी नहीं कर पाते. लेकिन इस गौरव के पीछे एक कड़वी हकीकत भी छिपी है।जिस दीये की लौ में सपना पनपा, उसी रोशनी में पढ़ाई कर एक बेटी ने ऐसा कर दिखाया, जिससे पूरा देश गर्व से भर गया. बाराबंकी की रहने वाली पूजा जो एक झोपड़ी में पली-बढ़ी, आज जापान में भारत का प्रतिनिधित्व कर आई है. मगर विडंबना देखिए जिस बच्ची ने विदेश में तिरंगे की शान बढ़ाई, उसके घर में आज भी बिजली नहीं , न ही शौचालय है.

आइए आपको बताते हैं पूजा के संघर्ष की अनोखी कहानी के बारे में….

कहां की रहने वाली है पूजा?

सिरौलीगौसपुर तहसील के अगेहरा गांव की रहने वाली इंटरमीडिएट की छात्रा पूजा आज देशभर के लाखों बच्चों के लिए मिसाल बन चुकी हैं. जून 2025 में भारत सरकार की ओर से पूजा को विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी के लिए जापान भेजा गया. वहां उन्होंने “धूल रहित थ्रेशर मशीन” जैसे मॉडल से देश की प्रतिभा का परचम लहराया.

लेकिन जब वो जापान से लौटीं, तो फिर उसी अंधेरे झोपड़े में वापस आ गईं,जहां बिजली का मीटर तो लगा है, लेकिन घर तक तार खींचने के पैसे नहीं हैं. जिस घर में दीया जलाकर पढ़ा, वहां अब भी उजाले का इंतजार है.

झोपड़ी से जापान तक का सफरपूजा का घर एक साधारण झोपड़ी है, जहां वह अपने माता-पिता और पांच भाई-बहनों के साथ रहती हैं. पिता पुत्तीलाल मजदूरी करते हैं और मां सुनीला देवी एक सरकारी स्कूल में रसोइया हैं. दीये की रोशनी में पढ़ाई करने वाली पूजा घर का काम भी संभालती हैं. चारा काटना, पशुओं की देखभाल और छोटे भाई-बहनों को पढ़ाना, सब कुछ खुद करती हैं.कक्षा 8 में बना डाला विज्ञान मॉडलपूजा की प्रतिभा पहली बार तब सामने आई जब वह कक्षा 8 में थीं. उन्होंने “धूल रहित थ्रेशर मशीन” का मॉडल बनाया, जिससे खेतों में उड़ने वाली धूल एक थैले में इकट्ठा हो जाती थी.

यह मॉडल पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए उपयोगी था. लगभग 3 हजार रुपये में बना यह मॉडल जिला, मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा. 2024 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान मेले में भी पूजा का चयन हुआ…

गांव के बच्चों को पढ़ानाअब पूजा का सपना है कि वह अपने गांव के गरीब बच्चों को शिक्षित करें और उन्हें आगे बढ़ने की राह दिखाएं. उनका मानना है कि प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बस जरूरत है सही मार्गदर्शन और सहयोग की. पूजा की कहानी जहां संघर्ष और सफलता की मिसाल है, वहीं यह प्रशासन और सिस्टम से एक बड़ा सवाल भी करती है. क्या एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा को घर में बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं दिलाना इतना मुश्किल है?..

पूजा पाल नेपिता पुत्तीलाल पाल व माता सुनीला पाल के साथ अपने टीचर राजीव श्रीवास्तव का नाम ऊँचा करते हुए बाराबंकी उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश का नाम रोशन किया है।

The Shepherd Times ऐसी प्रतिभा को Salute करता है।

उत्तर प्रदेश के इस जिले में 333 दिनों से धनगर समाज का धरना-प्रदर्शन अनिश्चित काल के लिए जारी

उत्तर प्रदेश के इस जिले में 333 दिनों से धनगर समाज का धरना-प्रदर्शन अनिश्चित काल के लिए जारी

धनगर समाज का अनिश्चितकालीन धरना पिछले 333 दिनों से मथुरा कचहरी के वट वृक्ष के नीचे जारी है। इस धरने की अगुवाई कल्याण सिंह बाबा कर रहे हैं,

जो दिन-रात धरने पर डटे हुए हैं। हाल ही में उनकी तबीयत खराब हो गई, लेकिन बाबा ने अस्पताल में भर्ती होने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक धनगर समाज के प्रमाण पत्र जारी नहीं होते, वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।आज प्रशासन की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट और डॉक्टरों की एक टीम आई, जिन्होंने बाबा की तबीयत का जायजा लिया। उन्होंने बाबा को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन बाबा ने इसे ठुकरा दिया।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके लिए मरना मंजूर है, लेकिन अपने समाज के हक के लिए लड़ाई छोड़ना नहीं। धनगर समाज विकास समिति के अध्यक्ष सतीश धनगर ने भी बाबा के समर्थन में कहा कि जब तक हमारे समाज के प्रमाण पत्र जारी नहीं होते, हम भी धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि अन्य जिलों में प्रमाण पत्र नियमित रूप से जारी हो रहे हैं, लेकिन मथुरा में प्रशासन की तानाशाही और पक्षपात के कारण ऐसा नहीं हो रहा है।समाज के लोगों का कहना है कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है, जिसे प्रशासन अनदेखा कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि धनगर समाज के नेता, मंत्री, विधायक और जिला पंचायत सदस्य होने के बावजूद, उनके समाज को उनके हक से वंचित किया जा रहा है। धनगर समाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाते, तब तक यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

Posted By – Bablu Baghel (https://x.com/BabluBaghel)

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धनगर संवैधानिक अधिकार के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु !


धनगर संवैधानिक अधिकार के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु !
धनगर संवैधानिक अधिकार के संबंध में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण अधोलिखित बिन्दुओं से समाज हित / न्याय हित में उत्तर प्रदेश निवासी सभी लोगों को अवगत कराना चाहता हूं। अतः जो व्यक्ति धनगर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पात्र हैं अर्थात गडरिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले वह व्यक्ति / परिवार जिनके सामान्य तौर पर शादी संबंध धनगर में हैं निखर में नहीं है विशेष तौर पर इस जानकारी का लाभ उठाते हुए धनगर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करें जिसके निरस्त किए जाने पर जनहित गारंटी अधिनियम में उपजिलाधिकारी को अपील करें:-

  1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी एवं जिला/तहसील प्रशासन को विधिक स्रोत से प्राप्त एकमात्र स्पष्टीकरण आदेश दिनांक 24 जनवरी 2019 (जो किसी भी न्यायालय से स्थगित नहीं है) के बिंदु संख्या 4 में उल्लेखित है कि ‘अशिक्षा एवम अज्ञानतावश पूर्व में जिन धनगर जाति के व्यक्ति या परिवार के सदस्यों के किन्ही अभिलेखों में धनगर जाति के स्थान पर संबैधानिक व्यवस्था के विपरीत गडेरिया आदि अंकित हो गया है और विभिन्न परिस्थितियों में उनको गडेरिया – अन्य पिछड़ा वर्ग का त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो गया है तो उसे धनगर जाति प्रमाण पत्र निर्गत न करने का आधार न माना जाय बल्कि उक्त त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण को निरस्त / निष्प्रभावी मानते हुए गडरिया जाति में वर्गीकरण धनगर निखर के आधार पर आवेदक के मूल निवास के आसपास से निर्विवादित परिवारों से स्थलीय पूछताछ एवम जांच पड़ताल कर सक्षम अधिकारी यह अवश्य सुनिश्चित कर लें कि आवेदक धनगर उपजाति का है अथवा निखर का । यदि आवेदक धनगर उपजाति का है तो उसे धनगर अनुसूचित जाति का ही प्रमाण पत्र निर्गत किया जाय।’ स्पष्टीकरण आदेश दिनांक 24 जनवरी 2019 के बिंदु संख्या 5 में उल्लेखित है कि अगर ‘धनगर उपजाति की पहचान करने में कोई कठिनाई हो तो धनगर निखर उपजातियों के बीच शादी संबंधों (रोटी, बेटी एवं हुक्का पानी) संबंधों के आधार
    पर स्थलीय जांच पड़ताल कर धनगर उपजाति के लोगों को धनगर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करना सुनिश्चित करें ।’
  2. माननीय उच्च न्यायालय में योजित पीआईएल संख्या 645/400 में दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश में भी 24 जनवरी 2019 को जारी एकमात्र स्पष्टीकरण आदेश को स्थगित नहीं किया गया है क्योंकि इस पीआईएल में दिए गए अंतरिम आदेश में अनुलग्नक 2, 3, 4 को ही स्थगित किया गया है जबकि 24 जनवरी 2019 का शासनादेश अनुलग्नक 1 के तौर पर उल्लेखित होने के कारण स्थगन का भाग नहीं है और कोर्ट आदेश में अपनी मर्जी से कुछ भी जोड़ने घटाने की अनुमति नहीं होती है। इस तथाकथित स्थगन आदेश में भी उल्लिखित है कि “benefit of reservation shall be strictly extended to the categories mentioned in Presidential Notification applicable to Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Other Backward Class in State of U. P” अर्थात राष्ट्रपति महोदय के आदेश में उल्लेखित Dhangar (धनगर) पर कोई रोक / स्थगन नहीं है।
  3. माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका संख्या 1582/2021 में स्पष्टीकरण आदेश दिनांक 24 जनवरी 2019 को स्थगन आदेश में शामिल करने के लिए स्थगन आदेश को मॉडिफिकेशन हेतु प्रयास किया गया जिसमें माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर रुपये 3000 का दंड लगाया तथा याचिका को निरस्त कर दिया।
  4. माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा जारी अनुसूचित जाति आदेश 1950 में क्रमांक 27 पर धनगर पूरे प्रदेश के लिए अधिसूचित है जिस पर कोई भी स्थगन नहीं है और ना ही बिना संविधान संशोधन के हो सकता है अतः समस्त शासनादेश स्थगित या निरस्त होने के बावजूद धनगर अनुसूचित जाति को उसका संवैधानिक अधिकार लेने से नहीं रोका जा सकता है। अर्थात बिना संविधान संशोधन के किसी भी पीआईएल में कुछ भी आदेश आने से
    धनगर अनुसूचित जाति को उसका संवैधानिक अधिकार लेने से नहीं रोका जा
    सकता है।
    5) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 40462/2009 में दिए गए आदेश के आधार पर अनुसूचित जाति आयोग द्वारा प्रदान किए गए स्पष्टीकरण को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 12436 / 2007 में स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति महोदय के आदेश में उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति की सूची में क्रमांक 27 पर उल्लिखित धनगर को धनगर ही माना गया है तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 34520/2006 में दिए गए आदेश के अनुसार धनगर को गडरिया समुदाय की एक उपजाति माना गया है।
  5. राज्य सरकार के जाति प्रमाण पत्र जारी करने संबंधी ऑनलाइन पोर्टल पर हिंदी और अंग्रेजी में धनगर Dhangar अनुसूचित जाति के लिए ही आवेदन किया जा सकता है। धनगढ़ या धांगर के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है ।
  6. आदरणीय कमिश्नर महोदय आगरा द्वारा 28/10/2022 को देवेश सिंह धनगर निवासी फिरोजाबाद के मामले में भी जिला जाति सत्यापन समिति फिरोजाबाद के आदेश को निरस्त करते हुए गडरिया समुदाय में धनगर और निखर वर्गीकरण के आधार पर जांच करने का आदेश पारित किया गया है।
  7. भारत सरकार द्वारा कराई गई विभिन्न जनगणना में धनगर अनुसूचित जाति की जनसंख्या विभिन्न जिलों में दर्शाई गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी एकमात्र स्पष्टीकरण आदेश 24 जनवरी 2019 में भी लिखा है कि धनगर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के लिए किया गया आवेदन यह कहकर निरस्त नहीं किया जा सकता कि अमुक जिले / तहसील में धनगर अनुसूचित जाति नहीं पाई जाती है।
    -इंजी. संतोष धनगर, आईईएस प्रदेश सचिव, ऑल इंडिया धनगर
    समाज महासंघ (रजि.) मो. 9868004027

धनगर समाज पत्र से संबंधित शासनादेश


धनगर समाज जिन्दाबाद !
प्रेषक,
स्पष्ट शासनादेश
मनोज सिंह (प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन)
सेवा में

  1. समस्त मण्डलायुक्त उ. प्र.
  2. समस्त जिलाधिकारी उ.प्र.
    समाज कल्याण अनुभाग – 3
    धनगर समाज जिन्दाबाद !
    संख्या : 207 सी. एम. / 26-3-2018
    लखनऊ : दिनांक 24 जनवरी 2019
    विषय : धनगर (DHANGAR) जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण निर्गत करने हेतु स्पष्टीकरण (Clarification Order) ।
    महोदय, उपर्युक्त विषय की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए मुझे कहने का निदेश हुआ है। कि धनगर जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए शासनदेश सं.1654/26 26.0.2013 दिनांक 25.10.2013 पत्र सं. 222 /2016/5506/26-3-2016 हरट 2010 दिनांक 16.12.2016, पत्र सं. 283, मा.स./ 26.3.2017.25 रिट/2010 दिनांक 26.09.2017, पत्र सं. 148म.स./ 26.3.2017- 253 रिट/2010 दिनांक 12.10.2017 एवं पत्र सं . – 453 / 26.3.2018 दिनांक 07.02.2018, निर्गत किये गये है। मा. मुख्यमंत्री जी को ऑल इण्डिया धनगर समाज महासंघ (पंजी.सं. S/W//2013) एवं जनजाति निधियों ने अवगत कराया है। कि उक्त निर्देशों के उपरान्त भी गड़रिया समुदाय की उपजाति धनगर (Dhangar ) के व्यक्तियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र सुगमतापूर्वक जारी नहीं किये जा रहे । सक्षम अधिकारी धनगर जाति के आवेदन पत्रों को गड़रिया (अन्य पिछड़े वर्ग) अथवा उपजाति के आधार पर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता है। अथवा धनगर जाति सम्बन्धित तहसील / जिला में नहीं रहती है इत्यादि कहकर निरस्त कर देते है यह उचित नहीं है।
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 341 में प्रवक्त प्रावधान के अन्तर्गत संविधान (अनुसूचित जातियों ) आदेश 1950 के तपबन्धो के जातियोंया जनजातियों (Castes, Races or Tribes) या उनका कोई भाग या समूह (Or Parts of or groups ) जो कि इस आदेश में वर्जित तथा राज्य विशेष से सम्बन्धित अनुसूची (भाग 1 से 16 तक) में है, को इस आदेश के अधीन स्थायी या क्षेत्रीय निवास के आधार पर उस जाति, उपजाति या जनजाति के उदस्यों को अनुसूचित जाति का उदस्य समझा जाएगा। इस सम्बन्ध में उ.प्र. लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसमचित व अन्य पिछड़े वर्गों के लिए अधिनियम 1994 की धारा –9 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए शासनादेश सं. 22/16/90-का-2 / 1998 टी. सी. – 111 कार्तिक अनुभाग – 02 दिनांक 05 जनवरी 1996 में अभ्यर्थी की जाति पर अभ्यार्थी मे मल निवास से स्थलीय-पूछताछ/ जाँच पड़ताल करके जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने का आदेश पारित किया गया है।
  4. सिविल रिट याचिका सं. 40462/2005 ऑल इण्डिया धनगर समाज महासंघ व अन्य में मो. उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्णय 14.03.2012 के पारित निर्णय में गड़रिया जाति की दो उपजातियाँ धनगर (Dhangar एवं नीखर (Nikhar) वर्गीकृत है। इन दोनों उपजातियों के बीच रोटी-बेटी एवं हुक्का-पानी के सम्बन्ध नहीं रहे है। भारतीय संविधान के अनुष्छेद 341 के अन्तर्गत निगत “संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश 1950” (यथा सशांधित) में भाग – 8 उत्तर प्रदेश राज्य के अन्तर्गत क्रमांक 27 पर धनगर (Dhangar ) समस्त राज्य ( Throughout the state) में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित है। यह जाति उत्तर प्रदेश राज्य के समस्त जनपदों में निवासरत है। शासन के सज्ञान में आया है। कि धनगर जाति के व्यक्ति सामाजिक हीन भावण अपने नाम के साथ पाल और बघेल उपनाम (Surname) लगते है। अतः एवं धनगर जाति के व्यक्तियों को उपनाम के आधार पर अनुसूचित जामि के अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है।
  5. उ0प्र0 लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों व अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा – 9 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एवं महाधिवक्ता की विधिक राय से शासन ने निणर्य लिया है कि अशिक्षा एवं अज्ञानतायशा पूर्व में जिन धनगर जाति के व्यक्ति के व्यक्ति अथवा उनके परिवार के सदस्यों के किन्ही अभिलेखों में धनगर जाति के स्थान पर संविधानिक व्यवस्था के विपरीत गड़रिया आदि अंकित हो गया है। और विभिन्न परिस्थितियों में उनको गड़रिया अन्य पिछड़ा वर्ग का त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो गया है। तो उसे धनगर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत न करने का आधार न माना जाये बल्कि उक्त त्रुटिपूर्ण जाति प्रमाण पत्र को रिस्त / निष्प्रभावी मानते हुए गड़रिया जाति में वर्गीकरण (धनगर एवं नीखर) के आधार पर आवेदक के मूल निवास स्थान के आस-पास के निर्विवादित परिस्तरों से स्थलीय पूछताछ जाँच पड़ताल कर समान अधिकारी यह अवश्य सुनिश्चित कर ले कि आवेदक धनगर उपजाति का है अथवा नीखर का । यदि आवेदक धनगर उपजाति का है तो णनगर अनुसूचित जाति का ही जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जाये। 5. यदि किसी जिला- तहसील में जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले सक्षम अधिकारियों को धनगर उपजाति ( व्यक्तियों के समूह) की पहचान करने में कठिनाई हो तो धनगर एवं नीखर उपजातियों के बीच शादी सम्बन्धों (रोटी-बेटी एवं हुक्का-पानी) के आचार पर स्थलीय सोच पड़ताल धनगर उपजाति के लोगो को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करना सुनिश्चित करें। इन स्पष्ट निर्देशो के उपरान्त भी यदि धनगर जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने को अनावश्यक रूप से विलम्ब किये जाने प्रकरण के संज्ञान के आयेगें तो सम्बन्धित अधिकारियों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी। अतः उपरोक्तानुसार स्थलीय – पूछताल / जाँच-पड़ताल करके धनगर जाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत करने को कष्ट करें। संख्या – 207 (1)/28-3-2018 तद दिनांक
    प्रतिलिपि निम्नलिखित की सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित ः–
  6. अपर मुख्य सचिव / प्रमुख महामहिम श्री राज्यपाल उ०प्र०
  7. समस्त अमर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव उ०प्र० शासन
  8. समस्त जिलाध्यक्ष / कार्यालयाध्यक्ष उ०प्र०
  9. अध्यक्ष / सचिव अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग उ०प्र० लखनऊ।
  10. प्रमुख सचिव मा0 मुख्यमंत्री उoप्रo शासन 4. अगर मुख्य सचिव
    भवदीय मनोज सिंह (प्रमुख सचिव )
  11. आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उ०प्र० लखनऊ
  12. निदेशक उच्च शिक्षा विभाग माध्यमिक शिक्षा विभाग, बेशिक शिक्षा विभाग प्राविधिक शिक्षा चिकित्सा शिक्षा कृषि विभाग उ०प्र०।
  13. निदेशक अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण विभाग, उ०प्र० / पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग उ०प्र०
  14. निदेशक अनुसचित जाति एवं जनजाति, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उ०प्र० ।
  15. सचिवालय के समस्त अनुभाग ।
  16. गार्ड फाइल।
    के बाबजूद धनगर अनुसूचित प्रमाण पत्र जारी न होने के कारण धनगर समाज करेगा चुनावी बहिष्कार
  17. निदेशक प्रशिक्षक श्रम एवं सेवा योजना उ०प्र० प्रशासिक अकादमी लखनऊ
  18. रजिस्ट्रर प्रदेश समस्त विश्वविद्यालयों ।
    भवदीय – मनोज सिंह (प्रमुख सचिव )
    निवेदक : धनगर समाज फिरोजाबाद

राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के द्वारा महिला सशक्तीकरण के लिए किए गए कार्य

राजमाता अहिल्याबाई होल्कर भारत में होलकर वंश की एक प्रमुख शासिका थीं,

जिन्होंने 18वीं शताब्दी में मालवा क्षेत्र पर शासन किया था। जबकि एक अवधारणा के रूप में महिला सशक्तिकरण उस तरह से अस्तित्व में नहीं था जैसा कि आज के समय में है,

राजमाता अहिल्याबाई होल्कर को महिलाओं के अधिकारों पर उनके प्रगतिशील विचारों और अपने राज्य में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए कदम उठाने के लिए जाना जाता था।

महिलाओं के अधिकारों के लिए उनके समर्थन का एक उल्लेखनीय उदाहरण महेश्वर में एक विशेष बाजार स्थापित करने का उनका निर्णय था, जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा चलाया जाता था। इस बाजार ने महिलाओं को अपना सामान बेचने और आजीविका कमाने के लिए जगह प्रदान की, जो आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

इसके अतिरिक्त, राजमाता अहिल्याबाई होल्कर को लड़कियों की शिक्षा सहित शिक्षा के समर्थन के लिए जाना जाता था। उन्होंने महेश्वर में एक महिला कॉलेज सहित कई स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना की। इसने लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा तक पहुंच प्रदान की, जो उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने और उचित निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण कारक था।

कुल मिलाकर, भले ही राजमाता अहिल्याबाई होल्कर महिला सशक्तिकरण की आधुनिक अवधारणा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं रही हों, लेकिन महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के प्रति उनके प्रगतिशील विचारों और कार्यों ने उनके राज्य में महिलाओं के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।

Edits – Dheeraj Pal

जानिए पाल समाज के बारे में ChatGPT ने क्या कहा

जब ChatGPT से पाल समाज के इतिहास के बारे में पूछा गया तो उसका ये उत्तर था।

पाल राजवंश प्राचीन भारत में एक प्रमुख शासक वंश था जो 8वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी तक अस्तित्व में था। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी क्षेत्र पर शासन किया, जिसमें वर्तमान बंगाल और बिहार शामिल थे।।

पाल वंश की स्थापना गोपाल ने की थी, जो 8वीं शताब्दी के अंत में बंगाल का शासक थे। गोपाल का उत्तराधिकारी उनके पुत्र धर्मपाल थे, जिसने राज्य का विस्तार किया और पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) में अपनी राजधानी स्थापित की। धर्मपाल बौद्ध धर्म के संरक्षक थे और उन्होंने अपने राज्य में धर्म के प्रसार को प्रोत्साहित किया।

उन्होंने प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की भी स्थापना की, जो बौद्ध शिक्षा का केंद्र था। धर्मपाल के पौत्र देवपाल के शासन में पाल राजवंश अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया। देवपाल ने बंगाल और बिहार से परे साम्राज्य का विस्तार किया, और उनके साम्राज्य में वर्तमान उड़ीसा, असम और उत्तरी भारत के कुछ हिस्से शामिल थे। वह अपनी सैन्य विजय और बौद्ध धर्म और कलाओं के संरक्षण के लिए जाने जाते थे।

पाल राजवंश को साहित्य, संगीत और कला के समर्थन के लिए भी जाना जाता था। प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान अतिश और तिलोपा पाल काल में रहते थे। पलास ने कई शानदार मंदिरों और अन्य स्थापत्य चमत्कारों को भी चालू किया, जिनमें से कुछ आज भी जीवित हैं, जैसे कि सोमपुरा महाविहार, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल।

पाल वंश का पतन 11वीं शताब्दी में शुरू हुआ, जब दक्षिणी भारत में चोल वंश के शासकों ने उनके क्षेत्र पर अतिक्रमण करना शुरू कर दिया। पलास आंतरिक संघर्षों से कमजोर हो गए थे, और 1162 में, वे सेना राजवंश से हार गए, जिससे उनके शासन का अंत हो गया। अपने अपेक्षाकृत कम शासनकाल के बावजूद, पाल राजवंश ने भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष रूप से कला, साहित्य और बौद्ध धर्म के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने एशिया के अन्य भागों में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और उनकी विरासत आज भी इस क्षेत्र में देखी जा सकती है।

Edits : Dheeraj Pal

Subhas Chandra Bose birth anniversary: Top quotes of the Netaji

Subhas Chandra Bose was one of the major Indian leaders during the struggle for Independence. Born on 23 January 1897, Bose quickly became the leader of the young, radical wing of the Indian National Congress hoping for socialist reforms in India.

A follower of Swami Vivekananda, Bose was given the honorific of ‘Netaji’ by many of his followers. Bose created the Indian National Army or Azad Hind Fauj in 1943 and tried to free India from the British yoke.

मथुरा में होली पर फायरिंग : गुलाल लगाने जा रहे युवक पर हमला; गोली लगने से संदीप बघेल की मौत

मथुरा के थाना छाता कोतवाली इलाके के बहरावली गांव में होली के दिन खूनी संघर्ष हो गया। यहां गुलाल लगाने जा रहे युवक को गांव के ही कुछ लोगों ने घेर लिया। आपसी कहासुनी के बाद नामजद आरोपियों ने युवक को गोली मार दी। जिसकी इलाज के लिए ले जाते समय मृत्यु हो गई। परिजनों ने हत्या को अंजाम देने वाले आरोपियों के खिलाफ थाना छाता में मुकद्दमा दर्ज कराया है।

गांव में गुलाल लगाने जा रहा था मृतक संदीप बघेल

छाता तहसील के गांव बहरावली का रहने वाला संदीप बघेल उर्फ होरीलाल अपने मित्र राहुल और भगवान सिंह के साथ गांव के ही रहने वाले रामहेत के यहां गुलाल लगाने जा रहा था। इसी दौरान वहां पहले से मौजूद धर्मवीर पुत्र धर्मपाल, पिंकू पुत्र लेखराज,साबिर पुत्र हमीदा व शाहिद पुत्र कन्नू से विवाद हो गया।


जान बचाने को छत पर भागा संदीप

विवाद के दौरान धर्मपाल,पिंकू,साबिर और शाहिद ने संदीप से कहा बड़ा नेता बनता है और मारपीट शुरू कर दी। संदीप अपनी जान बचाने के लिए भाग कर परसाती की छत पर चढ़ गया। नामजद वहां भी पीछे पीछे पहुंच गए और उसके साथ मारपीट करने लगे।

सर में मारी गोली

संदीप के साथ धर्मवीर,शाहिद और साबिर ने जमकर मारपीट की। इसके बाद शाहिद और साबिर ने कहा कि इसे जान से मार देते हैं। इतना सुनते ही धर्मवीर ने उसके पास मौजूद अवैध हथियार से संदीप के सर में गोली मार दी और मौके से भाग गए।

इलाज के लिए ले जाते समय हुई मौत

गोली की आवाज सुनकर ग्रामीण और संदीप के परिजन मौके पर पहुंचे। संदीप को घायल अवस्था में पड़ा देख उसे इलाज के लिए आगरा दिल्ली नेशनल हाईवे पर स्थित के डी मेडिकल कॉलेज ले जाया रहा था। इसी दौरान रास्ते में संदीप ने दम तोड दिया। इसके बाद परिजनों ने वारदात की जानकारी पुलिस को दी।


परिजनों ने किया थाना में शोर शराबा

संदीप की मौत के बाद थाना छाता पहुंचे परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग करते हुए तहरीर दी। संदीप के परिजन गोविंद ने बताया कि पुलिस को तहरीर दी है लेकिन पुलिस उनके लोगों से ही सवाल कर रही है। पुलिस से कार्यवाही को मांग को लेकर परिजनों ने थाना में शोर शराबा भी किया।

जांच में जुटी पुलिस

होली पर हुई युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने परिजनों से तहरीर ले ली। एसएसपी शैलेश पांडे ने बताया कि चार नामजद लोगों के खिलाफ तहरीर दी है विवाद तात्कालिक था या कोई और वजह है इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

8 मार्च, सुबह करीब 7 बजे ही संदीप को गोली मार दी गई थी, लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की और मीडिया ने इस मामले की खबर भी नहीं दी। अब मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
संदीप को इंसाफ दिलाने की कृपा करें।
#JusticeForSandeepBaghel

(The Shepherd Times 𓃵)

(Edit By – Dheeraj Pal)

Subhas Chandra Bose birth anniversary: Top quotes of the Netaji

“One individual may die for an idea, but that idea will, after his death, incarnate itself in a thousand lives.”

“Undoubtedly, purity and moderation are essential in childhood and youth.”

“No real change in history has ever been achieved by discussions.”

“Never lose your faith in the destiny of India.”

“Reality is, after all, too big for our frail understanding to fully comprehend. Nevertheless, we have to build our life on the theory which contains the maximum truth”

“Forget not that the grossest crime is to compromise with injustice and wrong.”

“Men, money, and materials cannot by themselves bring victory or freedom. We must have the motive-power that will inspire us to brave deeds and heroic exploits.”

“It is blood alone that can pay the price of freedom. Give me blood and I will give you freedom”

“We should have but one desire today – the desire to die so that India may live – the desire to face a martyr’s death, so that the path to freedom may be paved with the martyr’s blood.”

(Edited by : Dheeraj Kumar Pal)